इंडियन वाइफ की रात भर भरपूर चुदाई

मेरा नाम अन्जय है और मेरी उम्र 30 साल है, मैं एक शादीशुदा आदमी हूँ | मेरी बीवी का नाम चित्रा है और उसकी उम्र २६ साल है | मै इंडिया गवर्नमेंट में नौकरी करता हूँ | और मेरी फेमिली जहा रहती है मै वहा न रहकर दुसरे प्रदेश में नौकरी करता हूँ | और हमेशा एक प्रदेश से दुसरे प्रदेश में आता जाता रहता हूँ | वैसे ज्यादातर मै रात में यात्रा करता हूँ | क्योकि रात में यात्रा करने पर रात को सो भी लेता हूँ और सुबह नौकरी पर भी चला जाता हूँ |

दोस्तों तो मेरी कहानी सुरु होती है अब ये बात अभी अभी पिछले महीने की बात है | कि मै अपने बीवी के साथ शहर से दुसरे शहर मे जा रहा था और मैने रात वाली बस ली थी | हमारे सीट के सामने वाली सीट खाली थी और उसपर कोई नहीं बैठा था | बस मे, कोई ज्यदा सवारिया भी नहीं थी; केवल कुछ ही लोग थे और सब के सब सो रहे थे | मुझे देर से सोने के आदत थी, चित्रा सो चुकी थी, मै जाग रहा था और बोर हो रहा था | पहले स्टॉप से कुछ सवारिया चढ़ी जिसमे एक परिवार था | उसमे एक पति-बीवी, एक बुढा आदमी, एक बुढ़िया, और दो लडकें | मेरी नजर जल्द ही उस औरत पर पड़ी जो काफी सेक्सी और गदरायी बदन की थी |

उस औरत की उम्र 45 होगी, सब मेरे सामने वाले सिट पर जाकर बैठ गए | मुझे लगा, चलो सफ़र अच्छा कट जायेगा | उन्हें देख कर मेरी बीवी जग गई, एक प्यारी से मुस्कराहट के साथ उस औरत ने चित्रा से बातचीत शुरू की और आपस मे एक दुसरे को जाना | उनकी नाम सुलेखा है | व अपने सास-ससुर, पति और बच्चों के साथ मायके गए हुए थे | उनके दो बच्चे है एक बेटा और एक बेटी, बेटा 18 साल का और बेटी 12 साल की, दोनों स्कूल जाते है | उनको देखके लगा, सीधी सादी सभ्य महिला, उनका सरीर बहुत सेक्सी लग रहा था और ब्लाउज में से झाकती उनकी मोटी मोटी चुचिया बहुत मस्त लग रही थी | मैंने उसे गोर से देखा ..उनका बदन इतना सेक्सी था की में बता नहीं सकता बूब्स बड़े थे और पेट की चमड़ी मुड़ी हुई थी जिसे देख कर मैंने उनकी बुर की गहराई का अंदाज लगा लिया ..मांस से भरी हुयी जांघें साडी में से दिख रही थी बो सफ़ेद ब्लाउज पहने हुए थी उसमे से दूध का आकार साफ़ दिख रहा था |


अभी व घर जा रही है उनके पति सरकारी जॉब में हैं और रस्ते में उनकी सास-ससुर और लडकें पति के साथ उतर जायेंगे | सो उस महिला को अकेली ही सहर अपनी घर तक जाना पड़ेगा | लेकिन हमें पाकर उनकी चिंता कम हो गई | व मेरी बीवी से काफी घुल-मिल गयीं, बात करते-करते काफी वक़्त निकल गया; काफी दिलचस्प मैडम थी वो |

कुछ घंटे के बाद उनका जगह आ गया उनकी सास-ससुर, पति और बेटा उतर गए और बीवी से कह गए अपना ख्याल रखना | रात काफी हो चुकी थी और मुझे नीद आने लगी थी; तो, मैने उनको सोने के लिए बोला और काफी गहरी नीद मे सो गया | आधी रात के बाद, उन्होंने मुझे काफी जल्दी मे उठाया और बोली बस ख़राब हो गयी है | रास्ते मे बारिश के कारण, काफी पानी भर गया है और बस पानी मे चलने के कारण ख़राब हो गयी है और कल सुबह 10:00 बजे चलेगी | इतनी रात मे कोई दूसरा जाने का जरिया मिलना मुश्किल था | उन मैडम का नाम सुलेखा था | सुलेखा ने मुझे से पूछा, कि क्या करना चाहिए |

मैने कहा, इतनी रात मे कहाँ जायेंगे; यहीं होटल ढूंढ़कर कमरा ले लेते है और सुबह इसी बस से आगे चलेंगे | सुलेखा ने भी मेरे साथ हामी भर दी और मेरे साथ ही होटल ढूंढने चल दी | काफी मुश्किल एक होटल मिला और हमने वहा २ रूम मांगे | लेकिन, उनके पास एक ही रूम था; मैने सुलेखा को रूम लेने के लिए बोला और खुद दूसरा होटल देखने के लिए चलने लगा | सुलेखा ने बोला, एक ही रूम ले लेते है, कुछ ही घंटो की बात है मुझे कोई ऐतराज़ नहीं है | उसकी हां के बाद हम तीनों ने एक ही रूम ले लिया और रूम मे चले गये | हम सब ही काफी भीग चुके थे | सुलेखा बाथरूम मे चली गयी और चित्रा ने मुझे तोलिया दे दिया | मैने अपने सारे भीगे कपडे उतार दिए और तोलिये को अपनी कमर पे लपेट लिया |

मुझे सुसु जाना था और मुझे ये ध्यान नहीं रहा, कि बाथरूम मे सुलेखा भी है | मैने एक ही झटके के साथ बाथरूम ले दरवाजा खोल दिया और देखा, सुलेखा एकदम नंगे toilet पर बैठी हुई थी, उसकी नंगी शारीर को देख कर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया | क्या बड़े-बड़े स्तन थे, जब मैंने निचे देखा तो, अरे ये क्या, उसके पास तो एक लंड था |

मेरा आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा | क्या लम्बा और मोटा लंड था, मेरा लंड तो उसकी लंड का आधा होगा | लंड का लाल सुपाडा आधा बाहर था, और घने काले झांट लंड और अंडकोष के चारों और भरा हुआ था, मेरे आंख खुले के खुले रह गए | सुलेखा ने भी केवल कमर पर तोलिया लपेट रखा था | मैने उसको सॉरी बोला, और बाहर निकलने लगा |

उसने मुझे बोला, ठीक है और tiolet ख़त्म करके खुद बाहर आ गयी | मै सुसु करके कमरे मे आ गया | उसे देखते ही चित्रा को हैरानी हुई पर वो कुछ नहीं बोली | शायद उसे भी सुलेखा की नंगा बदन देखने में मजा आने लगा था | तो सुलेखा बोली मेरे पास और कुछ नही है पहने के लिए; इसलिए मुझे ऐसे हे रहना पड़ेगा | तुम्हे कोई ऐतराज़ तो नहीं, मै ख़ुशी से मारा जा रहा था, मैने कहा नहीं | वो मुस्कुराई और उसने मेरे हाथ नीचे कर दिए और अपना तोलिया खोल दिया | अब सुलेखा एकदम नंगी हमारे सामने खडी हुई थी | जब मेरी बीवी ने उसकी निचले हिस्से को देखा तो व हैरान थी; कि ये कोंन है? इसकी तो मस्त चुचे के साथ-साथ एक बड़ा सा लंड भी था | सुलेखा की लंड और बड़े-बड़े अंडकोष काले झांटों से भरा हुआ था | चित्रा को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था |

सुलेखा की लंड मुरझा हुआ था फिर भी लंड काफी लम्बा मोटा था, लाल सुपाडा करीब आधा बाहर था | उसने मुझे उसका लंड हाथ मे पकड़ा दिया | सुलेखा पुरी औरत ही थी, जैसे उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां, पतली कमर, चौड़ी उभरी नितम्ब और मोटी-मोटी चिकनी जांघें | उसकी गांड के तो क्या कहने … एकदम मांसल उभरी गांड थे | आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |  उसने हमें बोली, मेरे पास दोनों है और मैं पुरी तरह से चोद सकती हूँ और मेरे ऊपर चढ़ बैठी | उसकी लंड मेरे लंड से टकरा रहा था और वो मैं उसकी लंड को खड़ा करने की कोशिश कर रहा था | फिर, उसने मेरे हाथ अपनी कमर पर रख दिए और बोला जैसे मै करती हु, बिलकुल वैसे ही करना | वो अपने हाथ मेरी कमर पर फिराने लगी और मै भी वैसे ही करने लगा |

सुलेखा मेरे होटो पर आ गयी और उसको चूसने लगी | उसने मुझे पूछा, कभी किसी लंड वाली औरत के साथ सेक्स किया है ? मैने कहा नहीं, लेकिन करने की इच्छा है | फिर उसने अपने हाथ मेरी गांड पर चलाने शुरू किया और मेरी गांड के छेद को रगड़ना शुरू कर दिया | और फिर उसने फिर एक ऊँगली मेरी गांड के छेद मे डाल दी और और उसके अन्दर फिराने लगी, दूसरी हाथ से अपनी मुसल लंड को सहलाने लगी | मैने भी वही किया और मुझे उसकी ऊँगली अपने गांड मे लेने मे मज़ा आने लगा | उसकी लंड ने उठाना शुरू कर दिया, लेकिन अभी पूरा तनाव नहीं आया था | उसने मुझे पलग के किनारे से लगा दिया |

अब मेरा आधा शरीर पलंग के ऊपर लेटा था और टाँगे जमीन से चिपकी हुई थी | उसने अपने पर्स से एक कंडोम निकला और अपनी लंड के सुपाडा को बाहर कर लंड में कंडोम चढ़ा लिया | वो पलग के किनारे पे चढ़ गयी और अपना लंड मेरी गांड मे भिड़ा दिया | तभी चित्रा पीछे आ गई और सुलेखा की लंड को पकड़ कर सहलाते हुए मेरी गांड के छेद में रगड़ने लगी | उसने डालने से पहले मेरी गांड को और अपने लंड को अपने थूक से पूरा गीला कर लिया, ताकि को दिक्कत न हो |

उसके एक ही जोरदार धक्के ने मेरी गांड फाड़ दी और उसका पूरा लंड मेरी गांड मे घुस गया | मै दर्द से चिल्ला उठा, लेकिन सुलेखा कुछ सुन ही नहीं रही थी | व धीरे धीरे अपनी भारी गांड उछलती हुई लंड अन्दर-बाहर करने लगी | मुझे अब मजा आने लगा था | वो तो बस कुते की तरह चड़ी हुई अपनी भारी भरकम गांड हवा में उछालती हुई मेरी गांड मारे जा रही थी | फिर सुलेखा ने अपनी लंड बाहर निकल लिया, झट से चित्रा सुलेखा की लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी | थोड़ी देर लंड चूसने के बाद चित्रा फिर से सुलेखा की लंड मेरी गांड में दल दिया | चित्रा ने फिर से सुलेखा की मस्त गांड के छेद को चाटने में लग गई | कुछ समय बात मैने कुछ तेज़ झटको को महसूस किया और एक गरम-गरम पिचकारी अपनी गांड मे महसूस की |

कामिन झड चुकी और उसने कुछ देर आराम करने के बाद उठ खडी हुई और अपनी लंड से कंडोम निकल लिया | और चित्रा की मुह मे अपना लंड घुसा दिया | फिर अपने लंड हिलाने लगी | सुलेखा के स्तन बहुत मस्त थे | मैं एक हाथ से उसकी चुचे और दुसरे हाथ से चित्रा की चुचे दबा रहा था | सुलेखा और मेरी बीवी दोनों के मुह से आह.आह,,करके आवाज़े निकल रही थी | मेरी बीवी की मुह मे सुलेखा की लंड और एक हाथ मे मेरा लंड था और सुलेखा की लंड फूलकर बड़ा हो रहा था |

चित्रा एक हाथ से अपनी झांटों से भारी बुर में ऊँगली अन्दर-बाहर कर रही थी, ये देखते ही सुलेखा मुस्करा पड़ी और झट से चित्रा की मुँह से अपनी लंड बाहर निकल कर पलंग पर आ गई और चित्रा को झुका दिया और उसकी सारी और पेटिकोट सहित कमर तक उपर को उठा दी । चित्रा ने पैंटी नही पहन रखी थी । तभी सुलेखा ने चित्रा की दोनो टाँगे हवा मे उँची उठा दी और उसकी साडी और पेटीकोट अपने आप कमर के चारों और सिमट गया और झाड़ियों से हरा भरा बुर सुलेखा के चरने के लिए सामने खुला पड़ा था । सुलेखा चित्रा की चूत को एक टक देखती रही । क्या उभरी हुई मांसल चूत थी । चूत के होठों मे जैसे हवा भरी हुई हो, बीच की लाल रेखा स्पष्ट नज़र आ रही थी और चूत के साइड के काले लंबे बाल इधर उधर बिखरे हुए थे। सुलेखा ने चित्रा को थोडा अपनी और खींच उसके चूतड़ अपनी जाँघो पर रख लिए और सूमी के घूटने उसकी छाती से लगा दिए। अब मतवाली चूत पूरी तरह खुल के मलाई माल पुए खाने की दावत दे रही थी । सुलेखा बोली – कभी मेरी भी इसी तरह बुर थी, पर अब मुझे औरोतों की बुर चोदने में जबरदस्त मजा आता है |

सुलेखा ने कोई देर नही की और चित्रा की चूत के इर्द गिर्द जीभ फिरने लगी। बीच बीच मे जीब की नोक से चूत की दरार मे एक लकीर खींच देता और मेरी बीवी सिहर के सिसकारियाँ लेने लगती । सुलेखा ने चूतड़ के दोनो तरबूज अपने हाथ मे ले लिए और जीब जड़ तक पेल उसकी चूत के अंदर के हर हिस्से को जीब से छूने लगी और अपनी लंड को आगे-पीछे करने लगी । सुलेखा ने अपनी जीभ कड़ी कर के सिर आगे पीछे कर के मेरी बीवी की चूत को चोदने लगी । उसकी मज़ा दोगुना हो गया ।

अपने चूतर को ज़ोर-ज़ोर से उठाती हुए बोली, “और ज़ोर से, और ज़ोर से, हाई । वो अब झरने वाली थी । वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाते हुए अपनी चूत सुलेखा की पूरे चहेरे पर रगड़ रही थी । सुलेखा भी पूरी तेज़ी से जीभ लॅप-लपा कर चित्रा की चूत पूरी तरह से चाट रही थी । और बीच बीच मे अपनी जीभ को उसकी चूत मे पूरी तरह अंदर डाल कर अंदर बाहर करने लगी । चित्रा ने सुलेखा की चहेरे को अपनी जांघों मे जाकड़ कर अपनी चूत को उसकी मुँह से चिपका दिया । निचे बैठी सुलेखा की चौड़ी उभरी गांड देख कर मेरा लंड फिर से लोहे की रोड की तरह सख़्त हो गया था ।

सुलेखा उठ कर खडी हो गई और अपने लंड को हाथ से सहलाते हुए मेरी बीवी को पलंग पर घुटनों के बल लिटा कर झुका दिया । और उसकी सारी और पेटिकोट सहित कमर तक उपर को उठा दी । चित्रा ने पेंटी खोल रखी थी और फिर सुलेखा मुस्कुरा कर पलंग से उतरी और अपने चूतर को लहराते हुए ड्रेसिंग टेबल से वस्सेलीन की शीशी उठा लाई । ढक्कन खोल कर ढेर सारा वस्सलिन अपने हाथो मे ले लिया और अपनी लंड की मालीश करने लगी । अब उसकी लंड रोशनी मे चमकने लगा । फिर सुलेखा ने चित्रा को पलंग पर पेट के बल लिटा दिया और अपने घुटनो के बल होकर उसकी चूतर हवा मे उठा दिए । देखने लायक नज़ारा था । मेरी बीवी के गोल मटोल चूतर मेरी आँखों के सामने लहरा रहे थे । तभी सुलेखा ने ढेर सारे वस्सेलीन ऊँगली में लेकर चित्रा की गांड में दाल कर अन्दर-बाहर करने लगी |

फिर सुलेखा ने चित्रा की उभरी गांड की और झुकती हुई गांड फैलाई और पीछे हो उसकी गांड को जीभ की नोक से छेड़ने लगी । सुलेखा अब उसकी गांड मे अपनी पूरी जीब डाल अंदर-बाहर करने लगी । फिर सुलेखा अपनी जीभ चित्रा की गांड से बाहर निकल कर अपनी लंड को जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगी । बड़ा सेक्सी नज़ारा था मेरे सामने । औरत की बदन पे लंड देखने लायक था । सुलेखा से अब रहा नही गया और झुक कर चूतर को मुँह मे भर कर कस कर काट लिया और उठ कर घुटने का बल बैठ गई और लंड को पकड़ कर चित्रा की गांड के छेद पर रख दिया । चित्रा ने थोड़ा पीछे होकर लंड को निशाने पर रखा और अपने दोनो हाथों अपने चूतर को खींच कर गांड का छेद को फैला दिया । फिर सुलेखा ने उसकी चूतर को दोनो हाथों से पकड़ कर धक्का लगाया ।

सुलेखा की 9” का लंड चित्रा की गांड को चीरता हुआ पूरा का पूरा अंदर दाखिल हो गया । चित्रा फिर चीख उठी. . सुलेखा ने आगे को झुक कर उसकी चूंची को पकड़ लिया और उन्हे सहलाने लगी । लंड अभी भी पूरा का पूरा चित्रा की गांड के अंदर था । सुलेखा दोबारा सीधे होकर उसकी चूतर पकड़ कर धीरे-धीरे अपनी भारी गांड हिला कर लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया । चित्रा की गांड बहुत ही टाइट थी । मेरी बीवी और सुलेखा की चोदाई देखने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और मैं भी जोश मे आ गया और अपनी लंड को मुठियाने लगा । सुलेखा अब धीरे-धीरे अपनी रफ़्तार बढ़ा दी उसकी लंड अब पूरी तेज़ी से चित्रा की गांड मे अंदर-बाहर हो रहा था । चित्रा भी पूरी तेज़ी से कमर आगे पीछे करके सुलेखा की स्त्री लंड का मज़ा ले रही थी । चित्रा भी उंगली से चूत को चोद चोद कर अपनी मंज़िल के पास थी । सुलेखा मेरी बीवी के बदन को पूरी तरह अपनी बाहों मे समेट कर दनादन शॉट लगाने लगी । आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो भी सम्हल कर ज़ोर ज़ोर से आह उहह करती हुई चूतर आगे-पीछे करके अपनी चूत मे सुलेखा की लंड लेने लगी । उन दोनो की सांस फूल रही थी ।

अचानक सुलेखा ने चित्रा की गांड से अपनी लंड बाहर निकल ली और मुझे सोफे पर बैठने को कहा | सुलेखा ने मेरा लंड सीधा कर दिया और मेरी बीवी की गांड के छेद को मेरी लंड के ऊपर रख दिया और चित्रा की गांड को जोर से धक्का मारा | एक ही बार मे, मेरा लंड चित्रा की गांड मे था | और मैं अपना गांड उठाकर चित्रा को चोद रहा था | उतने मे, सुलेखा मेरी बीवी के सामने आयी और बुर को अपने थूक से गीला कर दिया | मुझे समझ आ गया; के, सुलेखा अब मेरी बीवी की बुर में अपनी लंड घुसएगी | उन्होंने, अपनी मोटा सा लंड को पकड़ कर मेरे चित्रा की झांटों से भरी बुर को फैलाया और लाल छेद पर लंड लगाया और जोर से धक्का मारा |

पूरा तो नहीं, लेकिन, कुछ हद तक सुलेखा की लंड चित्रा की बुर मे घुस गया | पीछे से धक्का लगने के कारण, सुलेखा की लंड और भी अन्दर घुस गया | मेरी बीवी दर्द के मारे तड़प रही थी और चिला रही थी | पुरे कमरे फच फच की आवाज से गूंज रहा था | सुलेखा अब अपनी तेज बढ़ाते हुए भारी गांड उछल रही थी और चित्रा की बुर छोड़ी जारही थी | कमरे में सुलेखा और मेरी बीवी की पहने हुए चूड़ियों और पैरों की पायल की झंकार गूंज रही थी | अब मैं और सुलेखा दोनों मेरी बीवी की गांड और बुर में एक साथ चोदाई करने लगे | मैं निचे से चित्रा की गांड चोद रहा था और सुलेखा ऊपर से उसकी बुर में लंड अन्दर-बाहर करके चोद रही थी | सुलेखा हांफने लगी और मस्ती में कराहने लगी | कुछ देर में मैं झड गया और अपना सारा गरम पानी चित्रा की गांड मै छोड़ चूका था | लेकिन, सुलेखा अभी भी बाकी थी | सुलेखा गप-गप मेरी बीवी की बुर में लंड अन्दर-बाहर कर रही थी | आख़िर सुलेखा की ज्वालामुखी फूट पड़ी और व चित्रा की स्तन से अपनी स्तन चिपका कर दो तिन बार हवा में अपनी भारी गांड उछली और चित्रा की बुर में झड गई .. चित्रा की भी चूत को झरने को थी और व भी चीख़्ती हुई झड गयी ।

कुछ देर बाद सुलेखा मेरी बीवी के ऊपर से उठ गई और अपनी मुरझी हुई लंड को पकड़ कर चित्रा की बुर पर झूक गयी और दोनो हाथो से जितना फैला सकती थी उतनी उसकी बुर फैला दी । चित्रा की बुर मे अंदर तक देखा जा सकता था । तभी सुलेखा ने आधी से अधिक जीब उसकी बुर मे दे दी और जीभ अंदर की बुर के अंदर की दीवारों पर चलाने लगी । सुलेखा अच्छी तरह से मारी हुई बुर से टपकती हुई वीर्य को चाटती रही । जब हम तीनों सुस्त हुए तो सुलेखा उठी और तौलिये को कमर में लपेटे बाथरूम की और चल पड़ी | मैं उत्साह के साथ उधर देखा, सुलेखा दरवाजा खुला ही छोड़ कर तौलिये को कर तक उठा कर अपनी भारी भरकम गांड दिखाती हुई बैठ गई और पेशाब करने लगी | सुलेखा पेशाब करने के बाद थोड़ी देर अपनी लंड सहलाती रही फिर उठकर कमरे के अंदर आने लगी |

जो भी हो, वो सेक्स बहुत ही मस्त था और मुझे बड़ा मज़ा आया | हम तीनो वही सोफे पर और जमीन पर नंगे ही सो गये, सुलेखा ने मेरी बीवी की भारी गांड के दरार में अपनी लंड सटा कर उसे बाहों में भर के सो गई |

उस दिन मुझे बड़ा मज़ा आया | औरसुबह को हम अपने-अपने रास्ते चल पड़े |

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